
Dindayal Bandooni
*****गज़लन*" रऴकणीं जिंदगी "*जनि-तनि करिक-जब द्वी पैसा ह्वेगीं, छलछल-बलबल- बलकणीं जिंदगी।। एक-हैंका- भलि-बुरी- छुयूं सूंणिक, सर इनै-सर उनै- जलकणीं जिंदगी।। यीं जिदंगी तमसु- चौतरफा हुयूं रैंद,कबि घैर-कबि बूंण-पलटणीं जिंदगी।। चार दिन यख- चार दिन वख जैकी, सरपट मुख ढकै-खऴकणीं जिंदगी।। गौं- गळ्याम क्वी- कै मुख नि लांदा, खूंटा टंगीं छांचसि-टऴकणीं जिंदगी।। 'दीन' हमकु त- क्य आज-क्य भोऴ, हमरि अब-उनिबि-रऴकणीं जिंदगी।।
@ दीनदयाल बन्दूणी 'दीन'जोगीमढ़ी, बटि..PUBLICED BYउत्तराखंड की लगूली
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गज़ल
न*" रऴकणीं जिंदगी "*
जनि-तनि करिक-जब द्वी पैसा ह्वेगीं,
छलछल-बलबल- बलकणीं जिंदगी।।
एक-हैंका- भलि-बुरी- छुयूं सूंणिक,
सर इनै-सर उनै- जलकणीं जिंदगी।।
यीं जिदंगी तमसु- चौतरफा हुयूं रैंद,
कबि घैर-कबि बूंण-पलटणीं जिंदगी।।
चार दिन यख- चार दिन वख जैकी,
सरपट मुख ढकै-खऴकणीं जिंदगी।।
गौं- गळ्याम क्वी- कै मुख नि लांदा,
खूंटा टंगीं छांचसि-टऴकणीं जिंदगी।।
'दीन' हमकु त- क्य आज-क्य भोऴ,
हमरि अब-उनिबि-रऴकणीं जिंदगी।।
@ दीनदयाल बन्दूणी 'दीन'
जोगीमढ़ी, बटि..
PUBLICED BYउत्तराखंड की लगूली
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