Dindayal Bandooni

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गज़ल
*" रऴकणीं जिंदगी "*
पाफड़म-पांणि सि-टऴकणीं जिंदगी।
तलबल- ढंड सि- छलकणीं जिंदगी।।
जनि-तनि करिक-जब द्वी पैसा ह्वेगीं,
छलछल-बलबल- बलकणीं जिंदगी।।
एक-हैंका- भलि-बुरी- छुयूं सूंणिक,
सर इनै-सर उनै- जलकणीं जिंदगी।।
यीं जिदंगी तमसु- चौतरफा हुयूं रैंद,
कबि घैर-कबि बूंण-पलटणीं जिंदगी।।
चार दिन यख- चार दिन वख जैकी,
सरपट मुख ढकै-खऴकणीं जिंदगी।।
गौं- गळ्याम क्वी- कै मुख नि लांदा,
खूंटा टंगीं छांचसि-टऴकणीं जिंदगी।।
'दीन' हमकु त- क्य आज-क्य भोऴ,
हमरि अब-उनिबि-रऴकणीं जिंदगी।।

@ दीनदयाल बन्दूणी 'दीन'
जोगीमढ़ी, बटि..