Dindayal Bandooni गज़ल
*****
*" ब्यो-पौंणै "*
न घार-न कुटमदरी- क्वी फिकर,
सोर-घोर मरीं- इखड़्या-रयां छा।।
गांणा-बजाणां- क्वी सगोर नीच,
फिर बि मैफिलम-हमीं छयां छा।।
रिश्तौं ख्याल हो-य सफेदी असर,
हर जगम-अगोड़ि मुख कयां छा।।
हमरि अकड़ बि- कम नि ह्वे अब,
लगणूं जन-बद्रिनाथ जै-पयां छा।।
नांणि-धूंणि का बिगैर-सूट पैरिक,
इन ह्वे जन-सात पांणीं- धुयां छा।।
'दीन' हमरि बाता बीच-कैन बोलु,
रुसांणा बि इन छा- जन पुयां छा।।

0 Comments