Dindayal Bandooni गज़ल
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*" ब्यो-पौंणै "*
ब्यो- पौंणै रंगा-दंग्यूंम- खुयां छां।
हम अजकल्यूं-कौथगेर-हुयां छां।।
न घार-न कुटमदरी- क्वी फिकर,
सोर-घोर मरीं- इखड़्या-रयां छा।।
गांणा-बजाणां- क्वी सगोर नीच,
फिर बि मैफिलम-हमीं छयां छा।।
रिश्तौं ख्याल हो-य सफेदी असर,
हर जगम-अगोड़ि मुख कयां छा।।
हमरि अकड़ बि- कम नि ह्वे अब,
लगणूं जन-बद्रिनाथ जै-पयां छा।।
नांणि-धूंणि का बिगैर-सूट पैरिक,
इन ह्वे जन-सात पांणीं- धुयां छा।।
'दीन' हमरि बाता बीच-कैन बोलु,
रुसांणा बि इन छा- जन पुयां छा।।
@ दीनदयाल बन्दूणी 'दीन'
१४०४२०२३
जोगीमढ़ी, बटि..