Dindayal Bandoon· गज़ल
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*"जवनी उमंग "*
हमरु रैंद- रगर्याट-फफर्याट- जीवनभर,
हमरु बगत- हरपणूं रैंद- हाय- टाफिम।।
हमरि ज्यूकि क्वी बात- हमरा ज्यूम रैंद,
सभि बात कख लेखीं- कागज-कापिम।।
एक खुटु यख-एक वख-मन कखाकख,
हमरि सरि जिंदगी बीत-भागम-भागिम।।
कमयूं-धमयूं बि- सबि यखि छुटि जांण,
वे लोक-क्वी कख लीग-धैरिक छातिम।।
क्वी काम- जब नि करु- दिन द्वफरिम,
नि फ्वाणा तब ऑखा- अंधेरि- रातिम।।
'दीन' ! ज्वनी उमंग- कख रैद-बुढापम,
बगैर तेला-कख रै उज्यऴु दिया-बातिम।।
@ दीनदयाल बन्दूणी 'दीन'
जोगीमढ़ी, बटि..
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