Dindayal Bandooni· गज़ल

*****
*" विक्रम संवत २०८१"*
नव विक्रम संवत २०८१ शुभ-दिन आज।
शुरुकरा आज बटि-अप्णु क्वी नयुं काज।।
नवदुर्गा पैलु दिन-आज शैलपुत्री थैं पूजा,
आज बटि- हिन्दू नववर्ष कु- डंका बाज।।
पच्छिमीं सस्कृति छोड़ि- अप्णि अपनावा,
भारतै बहुसस्कृति-कन भलि दींद बिराज।।
रूढ़िवादी नि बणां- नि बणां परयोगवादी,
चरातन बटि यख रायि- मिलु-जुलु साज।।
भारत माँ कु पैरादार-शीस मुकुट हिमालै।
येका पांयौं आजु-बाजु हिंदमासागर छाज।।
सदनि आस-विश्वास- ज्यूम- सांस रखण,
भारत माँ कि बचांण- दुसकरम्यूं से लाज।।
'दीन' आजा नवबर्षम-हमरु यी प्रण रौलु,
मुंडम सदनि बिरजदु रौ-भारत माँ कु ताज।।

@ दीनदयाल बन्दूणी 'दीन'
जोगीमढ़ी, बटि..